D&R Rule Part V
नियम 17 से 24 अपीलें
रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 के अंतर्गत, अनुशासनिक प्राधिकारी द्वारा निलंबित अथवा दंडित किए गए रेलवे कर्मचारी को सक्षम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया है।
अपील संबंधी नियमों का विवरण निम्नानुसार है —
नियम 17 से 24 – एक दृष्टि में
जिन आदेशों के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती — नियम 17
जिन आदेशों के विरुद्ध अपील की जा सकती है — नियम 18
अपीलीय प्राधिकारी — नियम 19
अपील की समय-सीमा — नियम 20
अपील का प्रारूप एवं प्रस्तुति — नियम 21
अपील पर विचार — नियम 22
अपीलीय आदेशों का कार्यान्वयन — नियम 23
अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान — नियम 24
नियम 17 जिन आदेशों के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती
इन नियमों में वर्णित प्रावधानों पर ध्यान दिए बिना, निम्नलिखित आदेशों के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकेगी —
राष्ट्रपति द्वारा पारित आदेश।
अनुशासनिक जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा पारित अंतरिम आदेश, जिनका उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना या जांच प्रक्रिया को सुगम बनाना हो।
(निलंबन आदेश इसमें शामिल नहीं होगा।)नियम 9 के अंतर्गत अनुशासनिक जांच अधिकारी द्वारा पारित आदेश।
नियम 18 जिन आदेशों के विरुद्ध अपील की जा सकती है
नियम 17 के अधीन रहते हुए, कोई भी रेलवे सेवक निम्नलिखित आदेशों के विरुद्ध अपील कर सकता है —
नियम 5 के अंतर्गत पारित अथवा माने गए (Deemed) निलंबन आदेश।
अनुशासनिक, अपीलीय अथवा पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा नियम 6 के अंतर्गत दी गई किसी भी सजा से संबंधित आदेश।
नियम 6 के अंतर्गत सजा बढ़ाए जाने से संबंधित आदेश।
ऐसा कोई आदेश जो —
लागू नियमों/समझौतों के अंतर्गत देय वेतन, भत्ते, पेंशन, भविष्य निधि, सेवा ग्रेच्युटी या अन्य लाभों से वंचित करता हो या उनमें कमी करता हो।
कर्मचारी के हितों के प्रतिकूल नियमों की व्याख्या करता हो।
ऐसा आदेश जो —
सजा के अतिरिक्त अन्य कारणों से कर्मचारी को उच्चतर सेवा, ग्रेड या पद से पदावनत करता हो।
पेंशनधारी रेलवे सेवक की पेंशन घटाता, रोकता या देय अधिकतम पेंशन से वंचित करता हो।
गैर-पेंशनधारी रेलवे सेवक की भविष्य निधि में विशेष अंशदान घटाता या रोकता हो।
ऐसा आदेश जो —
निलंबन अवधि अथवा माने गए निलंबन की अवधि के लिए जीवन निर्वाह भत्ता या अन्य लाभ निर्धारित करता हो।
निलंबन, बर्खास्तगी, पदच्युत या अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात पुनर्नियुक्ति के बीच की अवधि को ड्यूटी माना जाए या नहीं, यह निर्धारित करता हो।
नियम 19 अपीलीय प्राधिकारी
कोई भी रेलवे सेवक (जिसमें सेवा छोड़ चुके व्यक्ति भी सम्मिलित हैं) नियम 18 के अंतर्गत वर्णित आदेशों के विरुद्ध, इस उद्देश्य के लिए नियुक्त प्राधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकता है।
यदि कोई अपीलीय प्राधिकारी निर्धारित न हो, तो अपील —
उस प्राधिकारी के पास जाएगी जो दंड देने वाले प्राधिकारी का तत्काल वरिष्ठ हो।
यदि अपील या पुनरीक्षण में सजा बढ़ाई गई हो, तो उस प्राधिकारी के पास जाएगी जिसके अधीन सजा बढ़ाने वाला प्राधिकारी कार्यरत हो।
नियुक्ति करने वाले या दंड देने वाले प्राधिकारी में से जो वरिष्ठ हो, उसके पास अपील की जाएगी।
नियम 20 अपील की समय-सीमा
अपील, आदेश की प्राप्ति की तिथि से 45 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए।
हालाँकि, यदि अपीलीय प्राधिकारी यह संतुष्ट हो कि विलंब के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय कारण हैं, तो वह समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।
नियम 21 अपील का प्रारूप एवं विषय-वस्तु
अपीलकर्ता स्वयं अपने नाम से अपील करेगा।
किसी कानूनी सलाहकार, सहायक या संघ द्वारा अग्रसारित/प्रतिहस्ताक्षरित अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।अपील उस प्राधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी, जिसके समक्ष अपील की जानी है, तथा उसकी एक प्रति आदेश पारित करने वाले प्राधिकारी को भी भेजी जाएगी।
अपील में सभी आवश्यक तथ्य शामिल होंगे, परंतु अशोभनीय या अनुचित भाषा का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
नियम 22 अपील पर विचार
अपीलीय प्राधिकारी निम्न बिंदुओं पर विचार करेगा —
निलंबन आदेश उचित है या नहीं।
सजा दिए जाने अथवा बढ़ाए जाने की स्थिति में —
क्या नियमों का पालन किया गया है।
क्या दी गई सजा उचित, अनुचित या अत्यधिक कठोर है।
अपीलीय प्राधिकारी —
सजा की पुष्टि कर सकता है,
सजा घटा सकता है,
सजा बढ़ा सकता है,
सजा निरस्त कर सकता है,
या मामला पुनः विचार हेतु सक्षम प्राधिकारी को भेज सकता है।
नियम 23 अपीलीय आदेशों का कार्यान्वयन
जिस प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील की गई थी, वह अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों को लागू करेगा।
नियम 24 अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान
यदि किसी अराजपत्रित कर्मचारी को बर्खास्तगी, पदच्युत, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी गई हो, तो अपीलीय प्राधिकारी निर्णय से पूर्व व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) का अवसर प्रदान कर सकता है।
ग्रुप ‘C’ एवं ‘D’ कर्मचारियों के लिए, अपील निस्तारण के बाद पुनरीक्षण का भी प्रावधान है, जो निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जा सकता है।
