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01. वाणिज्य (Commercial) विभाग के कार्य – भारतीय रेल
भारतीय रेल का वाणिज्य विभाग मुख्य रूप से राजस्व अर्जन, यात्री सेवाओं और व्यावसायिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है। इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
यात्री सेवाएँ
टिकट बुकिंग व आरक्षण (PRS, UTS, ऑनलाइन/ऑफलाइन)
यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाएँ
यात्रियों की शिकायतों एवं सुझावों का निवारण
माल एवं पार्सल सेवाएँ
माल व पार्सल की बुकिंग, लोडिंग, अनलोडिंग एवं डिलीवरी
माल भाड़ा (टैरिफ), बिलिंग एवं दावों का निपटारा
माल ढुलाई व्यवसाय को बढ़ावा देना
टिकट जाँच एवं राजस्व संरक्षण
ट्रेनों एवं स्टेशनों पर टिकट जाँच
बिना टिकट यात्रा रोकना एवं राजस्व हानि को रोकना
नियमों के अनुसार जुर्माना वसूलना
केटरिंग एवं ठेका प्रबंधन
खानपान सेवाओं की निगरानी (IRCTC के साथ समन्वय)
स्टॉल, पार्किंग, विज्ञापन एवं लीज़ का प्रबंधन
वाणिज्यिक योजना एवं विपणन
यात्री एवं माल यातायात की योजना बनाना
राजस्व बढ़ाने हेतु विपणन रणनीतियाँ तैयार करना
दावे एवं रिफंड
माल, पार्सल व यात्रियों से संबंधित दावों का निपटारा
टिकट रिफंड एवं मुआवज़े के मामलों का निस्तारण
अन्य विभागों से समन्वय
परिचालन, लेखा, इंजीनियरिंग एवं सुरक्षा विभागों के साथ समन्वय
8. अन्य रचनाएँ
(क) दरों का निर्धारण, अर्थात् किराया एवं भाड़ा, वसूली
इसमें आईआरसीए की अहम भूमिका है, जिसकी वाणिज्यिक समिति के सदस्य सभी जोन के सीसीएम भी हैं।
(ख) यात्री सुविधाएँ – यात्रियों की संख्या के अनुसार उन्हें सुविधाएँ प्रदान करने के लिए स्टेशनों को सात श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जैसे कि ए1, ए, बी, सी, डी, ई, एफ, जिनमें उनकी श्रेणी के अनुसार जल आपूर्ति, बैठने की व्यवस्था, विश्राम कक्ष, शौचालय/मूत्रालय, पंखे, स्नानघर, स्टेशन की सजावट आदि शामिल हैं। इसके साथ ही यात्री ट्रेन में पीने का पानी, शौचालय, पंखे और भोजन की व्यवस्था भी की गई है।
(सी) दावा निवारण एवं निपटान
(घ) जनता की शिकायत एवं संबंध
उपरोक्त कार्यों के अलावा, वाणिज्य विभाग के कई अन्य कार्य भी हैं जिनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।
(i) अधिक शुल्क की वापसी।
(ii) विलंब शुल्क और घाट शुल्क का संग्रह
(iii) नए कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केंद्र खोलना
(iv) नया /UTS स्थापित करना
(v) ZRUCC, DRUCC, SRUCC के साथ संवाद
(vi) सिटी बुकिंग ऑफिस, सिटी बुकिंग एजेंसियां, आउट एजेंसियां खोलना
(vii) ठहराव स्टेशन बनाना और ठेकेदारों की व्यवस्था करना
(viii) खानपान की देखरेख
(ix) लावारिस माल का निपटान
(x) विपणन एवं बिक्री गतिविधियों में वृद्धि करना
(xi) पक्ष लेने संबंधी समझौतों से निपटना
(xii) व्यावसायिक समुदाय के साथ क्रेडिट सुविधाओं को बहाल करना जैसे – क्रेडिट नोट सह चेक।
(xiii) स्टेशन बकाया का संग्रह
(xiv) नई ट्रेनों का संचालन।
(xv) माल का परिवहन विशेष दरों पर, जैसे स्टेशन से स्टेशन दर, एकमुश्त दर आदि पर करना।
