D&R Rule Part VI
नियम 25 एवं 25-A पुनरीक्षण (Revision एवं Review)
“रिवीजन (Revision)” शब्द का हिंदी अर्थ है दोहराना तथा “रिव्यू (Review)” शब्द का अर्थ है फिर से देखना अर्थात पुनरीक्षण।
अतः Revision का तात्पर्य है कि किसी जांच या दंडारोपण प्रक्रिया के अभिलेखों को दोबारा देखकर, यदि कोई त्रुटि हो तो उसमें सुधार किया जाए।
इसी प्रकार, यदि किसी जांच प्रक्रिया के परिणामस्वरूप दिए गए दंड के बाद कोई ऐसा नया तथ्य सामने आता है जो दंड का निर्णय लेते समय उपलब्ध नहीं था अथवा किसी कारणवश प्रस्तुत नहीं किया जा सका था, और जिससे पूरे मामले अथवा दंड की प्रकृति में परिवर्तन संभव हो, तो सक्षम प्राधिकारी पूरे मामले का पुनरीक्षण कर नया आदेश पारित कर सकता है।
पुनरीक्षण – नियम 25
इन नियमों के किसी भी प्रावधान पर ध्यान दिए बिना, निम्नलिखित प्राधिकारी —
राष्ट्रपति, अथवा
किसी क्षेत्रीय रेलवे के महाप्रबंधक या उसके समकक्ष, अथवा
यदि अपील नहीं की गई हो, तो ऐसा अपीलीय प्राधिकारी जो मंडल रेल प्रबंधक से नीचे के स्तर का न हो, अथवा
ऐसा कोई अन्य प्राधिकारी जो सहायक विभागाध्यक्ष से नीचे के स्तर का न हो,
स्वेच्छा से या किसी अन्य आधार पर किसी अनुशासनिक जांच से संबंधित अभिलेख मंगाकर, इन नियमों के अंतर्गत पारित किसी भी आदेश को संशोधित करते हुए नया आदेश पारित कर सकता है।
परंतु ऐसा करते समय, जहाँ आवश्यक हो, संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श लेना अनिवार्य होगा।
सक्षम प्राधिकारी —
किसी आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्तीकरण कर सकता है,
दी गई सजा की पुष्टि, कमी, वृद्धि या समाप्ति कर सकता है,
अथवा यदि कोई सजा नहीं दी गई हो तो सजा दे सकता है,
या मामले को आगे जांच हेतु संबंधित अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी को निर्देशों सहित भेज सकता है,
या कोई अन्य उपयुक्त आदेश पारित कर सकता है।
महत्वपूर्ण उपबंध
किसी रेलवे सेवक को सजा देने या सजा बढ़ाने का आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा, जब तक उसे प्रस्तावित सजा के विरुद्ध प्रतिवेदन देने का उचित अवसर न दिया गया हो।
यदि प्रस्तावित सजा नियम-6 के अंतर्गत दीर्घ दंड की श्रेणी में आती है, तो नियम-9 के अनुसार पूर्ण जांच अनिवार्य होगी (नियम-14 की स्थिति न होने पर)।
पुनरीक्षण की प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं की जा सकती जब तक —
अपील की समय-सीमा समाप्त न हो जाए, अथवा
यदि अपील की गई हो तो उसका निस्तारण न हो जाए।
रेलवे दुर्घटनाओं से संबंधित मामलों में यह नियम लागू नहीं होगा।
पुनरीक्षण प्रतिवेदन पर उसी प्रकार विचार किया जाएगा जैसा अपील पर किया जाता है।
पुनरीक्षण की सीमाएँ
पुनरीक्षण की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जाएगा —
यदि उसी मामले में पुनरीक्षण प्राधिकारी पहले ही आदेश पारित कर चुका हो।
यदि अपील की जा चुकी हो और पुनरीक्षण प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी से वरिष्ठ न हो।
निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो जाने के बाद।
हालाँकि, राष्ट्रपति पर ये सीमाएँ लागू नहीं होंगी।
समय-सीमा (Limitation)
पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत करने की समय-सीमा 45 दिन है।
यह अवधि —
मूल आदेश की तिथि से, अथवा
यदि अपील हुई हो, तो अपीलीय आदेश की तिथि से गिनी जाएगी।
यदि सक्षम प्राधिकारी विलंब के कारणों से संतुष्ट हो, तो 45 दिन के बाद भी पुनरीक्षण स्वीकार किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
महाप्रबंधक से नीचे स्तर का कोई भी प्राधिकारी बिना समय-सीमा के पुनरीक्षण नहीं कर सकता।
एक ही मामले में एक से अधिक बार पुनरीक्षण नहीं किया जा सकता।
रेलवे बोर्ड, महाप्रबंधक और राष्ट्रपति बिना समय-सीमा के पुनरीक्षण कर सकते हैं।
यदि पुनरीक्षण लंबित रहते हुए कर्मचारी की मृत्यु हो जाए, तब भी गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
रिव्यू – नियम 25-A
Review का अर्थ है किसी अनुशासनिक कार्यवाही में पारित आदेशों को फिर से देखना।
यदि विभागीय कार्यवाही के बाद कोई नया महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है, जो जांच के समय उपलब्ध नहीं था, और जिससे मामले की मूल प्रकृति बदल जाती हो, तो राष्ट्रपति स्वेच्छा से या अन्य आधार पर आदेश का रिव्यू कर सकते हैं।
परंतु —
बिना कर्मचारी को सुनवाई का अवसर दिए कोई दंड नहीं दिया जाएगा।
दीर्घ दंड देने से पूर्व पूर्ण जांच एवं UPSC परामर्श अनिवार्य होगा।
D&R Rule Part VII
अन्य नियमों का संक्षेप आदेशों की तामील – नियम 26
सभी आदेश व्यक्तिगत रूप से या पंजीकृत डाक द्वारा दिए जाएंगे।
समय-सीमा में छूट – नियम 27
उचित कारणों से सक्षम प्राधिकारी समय-सीमा बढ़ा सकता है।
UPSC परामर्श की प्रति – नियम 28
आदेश के साथ UPSC की राय की प्रति कर्मचारी को दी जाएगी।
निरसन – नियम 29
पूर्ववर्ती असंगत नियम निरस्त माने जाएंगे।
संदेह समाधान – नियम 30
नियमों की व्याख्या पर संदेह होने पर मामला राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।
राष्ट्रपति को प्रतिवेदन – नियम 31
रेलवे सेवक राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देने के अधिकार से वंचित नहीं होगा।
| **मानक प्रपत्र संख्या** | **विवरण** |
| ———————– | ——————————————————————————————————————————————————– |
| **1** | नियम 5(1) के अंतर्गत निलंबन आदेश |
| **2** | नियम 5(2) के अंतर्गत विचाराधीन (Deemed) निलंबन आदेश |
| **3** | नियम 2043 (1) आर-आई के अंतर्गत निलंबित कर्मचारी द्वारा दिया जाने वाला प्रमाण-पत्र |
| **4** | नियम 5(5)(c) के अंतर्गत निलंबन आदेश को वापस (Revocation) लेने का आदेश |
| **5** | नियम 9 के अंतर्गत दीर्घ दंड आरोपण हेतु आरोप-पत्र |
| **6** | दस्तावेजों के निरीक्षण की सुविधा न देने संबंधी आदेश |
| **7** | जांच बोर्ड / जांच अधिकारी की नियुक्ति का आदेश |
| **8** | प्रस्तुतिकरण अधिकारी (Presenting Officer) की नियुक्ति का आदेश |
| **9** | जारी नहीं किया गया |
| **10** | संयुक्त (Common) कार्यवाही के नियमों के अंतर्गत कार्यवाही करने का आदेश |
| **10 (क)** | संयुक्त जांच कार्यवाही के अंतर्गत जांच अधिकारी की नियुक्ति |
| **10 (ख)** | संयुक्त जांच कार्यवाही के लिए प्रस्तुतिकरण अधिकारी की नियुक्ति |
| **11** | लघु आरोप-पत्र (लघु दंड आरोपण हेतु) |
| **11 (ख)** | जब नियम 11(1)(ख) के अंतर्गत लघु आरोप-पत्र जारी किए जाने की स्थिति में अनुशासनिक जांच कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु आरोप-पत्र |
| **11 (ग)** | पहले दीर्घ दंड आरोप-पत्र जारी होने की स्थिति में लघु दंड आरोपण की कार्यवाही करने हेतु |
| **12** | नियम 14(1) के अंतर्गत कार्यवाही करने हेतु ज्ञापन |
| **13** | नियम 2308 आर-आई (1958 संस्करण) के अंतर्गत सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए ज्ञापन |
| **14** | नियम 2308 आर-आई (1958 संस्करण) के अंतर्गत सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु जांच कार्यवाही के लिए मानक आरोप-पत्र |
