PART III :- PENALTIES AND DISCIPLINARY AUTHORITIES
नियम 6. दंड (Penalties)
(क) लघु दंड (Minor Penalties)
(i) निंदा (Censure)
(ii) निर्दिष्ट अवधि के लिए पदोन्नति रोकना।
(iii) रेलवे सेवक द्वारा लापरवाही या आदेशों के उल्लंघन के कारण सरकार या रेलवे प्रशासन को हुई किसी भी प्रकार की आर्थिक हानि की संपूर्ण या आंशिक राशि की उसके वेतन से वसूली।
(रेलवे बोर्ड पत्र सं. E(D&A)2000 RG 6-64 दिनांक 30.01.2001 – RBE 22/2001)
(iii-a) विशेषाधिकार पास (Privilege Pass) या विशेषाधिकार टिकट आदेश (Privilege Ticket Order) अथवा दोनों को रोकना।
(iii-b) वेतनमान में निम्न स्तर पर अवनति, अधिकतम तीन वर्ष की अवधि के लिए, बिना संचयी प्रभाव के तथा जिससे पेंशन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
वेतनमान में एक स्तर की अवनति, अधिकतम 3 वर्ष की अवधि के लिए, बिना संचयी प्रभाव के और पेंशन पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना।
(रेलवे बोर्ड पत्र सं. E(D&A)2003 RG 6-33 दिनांक 10.12.2004 – RBE 255/2004 द्वारा प्रतिस्थापित)
(iv) निर्दिष्ट अवधि के लिए वेतन वृद्धि रोकना, साथ ही यह निर्देश देना कि उक्त अवधि की समाप्ति पर यह भविष्य की वेतन वृद्धि को स्थगित करेगा या नहीं
(ख) प्रमुख दंड (Major Penalties)
(v) खंड (iii-b) में वर्णित स्थिति को छोड़कर, वेतनमान में निम्न स्तर पर अवनति, निर्दिष्ट अवधि के लिए, तथा यह निर्देश देते हुए कि अवधि समाप्त होने पर भविष्य की वेतन वृद्धि स्थगित होगी या नहीं।
(vi) वेतनमान, ग्रेड, पद या सेवा में अवनति, साथ या बिना इस संबंध में निर्देशों के कि किस शर्त पर रेलवे सेवक को पुनः उस ग्रेड, पद या सेवा में बहाल किया जाएगा तथा बहाली पर उसकी वरिष्ठता एवं वेतन क्या होगा।
(रेलवे बोर्ड पत्र सं. E(D&A)2001 RG 6-58 दिनांक 28.11.2002 – RBE 217/2002 द्वारा स्पष्टीकरण)
(vii) अनिवार्य सेवानिवृत्ति।
(viii) सेवा से हटाना (Removal), जो भविष्य में सरकार या रेलवे प्रशासन के अधीन रोजगार के लिए अयोग्यता नहीं होगा।
(ix) सेवा से बर्खास्तगी (Dismissal), जो सामान्यतः भविष्य में सरकार या रेलवे प्रशासन के अधीन रोजगार के लिए अयोग्यता होगी।
विशेष प्रावधान
यदि किसी व्यक्ति को ऐसे किसी कार्य या चूक का दोषी पाया जाता है जिससे रेलवे ट्रेनों की टक्कर हुई हो या सामान्यतः होने की संभावना रही हो, तो सामान्यतः खंड (viii) या (ix) में वर्णित दंडों में से कोई एक दंड दिया जाएगा।
रेलवे सिग्नल को खतरे की स्थिति में पार करने (Signal Passed at Danger – SPAD) के मामलों में, सामान्यतः खंड (v) से (ix) तक के दंडों में से कोई एक दंड दिया जाएगा।
यदि ऐसा दंड नहीं दिया जाता है, तो उसके कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाएंगे।
यदि कोई व्यक्ति ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का दोषी पाया जाता है अथवा किसी सरकारी कार्य को करने या न करने के बदले अवैध पारितोषिक स्वीकार करने या प्राप्त करने का दोषी पाया जाता है, तो सामान्यतः खंड (viii) या (ix) के अंतर्गत दंड दिया जाएगा।
यदि ऐसा दंड नहीं दिया जाता है, तो कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाएंगे।
(रेलवे बोर्ड पत्र सं. E(D&A)2001 RG 6-29 दिनांक 31.10.2001 – RBE 215/2001)
स्पष्टीकरण – 1
निम्नलिखित को इस नियम के अंतर्गत दंड नहीं माना जाएगा, अर्थात्:
(i) विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण न करने के कारण वेतन वृद्धि रोकना।
(ii) दक्षता बाधा (Efficiency Bar) पार करने के लिए अनुपयुक्त पाए जाने पर वेतनमान में रोक।
(iii) पात्र होने के बावजूद, विचार के पश्चात पदोन्नति न दिया जाना।
(iv) उच्च पद पर कार्यरत रेलवे सेवक को प्रशासनिक कारणों से या अनुपयुक्त पाए जाने पर निम्न पद पर वापस करना।
(v) परिवीक्षा (Probation) पर नियुक्त रेलवे सेवक को परिवीक्षा अवधि के दौरान या समाप्ति पर उसके मूल पद पर वापस करना।
(vi) प्रतिनियुक्ति पर लिए गए रेलवे सेवक को मूल विभाग को वापस भेजना।
(vii) सेवानिवृत्ति या अधिवार्षिकी से संबंधित नियमों के अनुसार की गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति।
(viii) निम्न स्थितियों में सेवा समाप्ति (Termination):
(क) परिवीक्षा अवधि के दौरान या समाप्ति पर
(ख) अस्थायी रेलवे सेवक की सेवा समाप्ति
(ग) अनुबंध के अंतर्गत नियुक्त रेलवे सेवक की सेवा समाप्ति
(ix) निम्न कारणों से सेवा से मुक्त करना (Discharge):
(क) शारीरिक फिटनेस के निर्धारित मानक को पूरा न करने के कारण अक्षमता
(ख) स्थापना में कटौती के कारण
नियम–7 अनुशासनिक प्राधिकारी (Disciplinary Authority)
रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 के नियम 7 के अंतर्गत अनुशासनिक प्राधिकारी निम्नानुसार हैं–
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भारत के राष्ट्रपति सर्वोच्च अनुशासनिक प्राधिकारी हैं। अतः वे रेलवे कर्मचारी को नियम 6 के अंतर्गत कोई भी दंड दे सकते हैं।
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उपनियम (1) के प्रावधानों को प्रभावित किए बिना, इन नियमों की अनुसूचियों में निर्दिष्ट कोई भी अनुशासनिक प्राधिकारी, उसमें निर्दिष्ट पद पर कार्यरत किसी भी रेलवे सेवक को नियम 6 में वर्णित कोई भी दंड दे सकता है।
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उच्चतर पद पर स्थानापन्न (officiating) रेलवे कर्मचारी के मामले में अनुशासनिक प्राधिकारी का निर्धारण उसके वर्तमान स्थानापन्न उच्च पद के आधार पर किया जाएगा, न कि उसके मूल पद के आधार पर।
नियम – 8 अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु सक्षम प्राधिकारी
रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1968 के नियम 8 के अंतर्गत किसी रेलवे सेवक के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए प्राधिकृत प्राधिकारी निम्नलिखित होंगे–
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भारत के राष्ट्रपति अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोई भी प्राधिकारी, यदि ऐसा चाहे, तो–
(क) किसी रेलवे सेवक के विरुद्ध अनुशासनिक जांच प्रारंभ कर सकता है।
(ख) किसी रेलवे सेवक को नियम 6 के अंतर्गत दंड देने के लिए सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी को अनुशासनिक जांच प्रारंभ करने का आदेश दे सकता है।
नियम – 9
प्रमुख दंडारोपण (Major Penalty) की जांच प्रक्रिया
किसी सरकारी सेवक को तब तक दंडित नहीं किया जा सकता जब तक उसे—
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उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना न दे दी जाए, तथा
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उसे अपने बचाव का उचित अवसर (Reasonable opportunity of defence) प्रदान न किया जाए।
सेवा से बर्खास्तगी, पदच्युत या पदावनति जैसे दंडों के अतिरिक्त निम्नलिखित को भी रेलवे सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमों के अंतर्गत दंड की सूची में शामिल किया गया है–
(i) समय वेतनमान में निम्न स्तर पर पदावनति
(ii) निम्न वेतनमान, पद, ग्रेड या सेवा में पदावनतिइन दंडों को देने से पूर्व संविधान के अनुच्छेद 311(2) के अनुसार बचाव का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।
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जांच की अनिवार्य शर्तें
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आरोप पत्र तभी जारी किया जाना चाहिए जब आरोपों के समर्थन में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हों।
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आरोप पत्र के साथ निम्नलिखित संलग्न होना अनिवार्य है–
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आरोपों का विवरण
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प्रत्येक आरोप का पृथक विवरण
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दस्तावेजों की सूची
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गवाहों की सूची
जिससे आरोपित कर्मचारी को अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।
जो विवरण आरोप पत्र के साथ संलग्न नहीं होंगे, उन्हें जांच में शामिल नहीं किया जाएगा। -
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प्रमुख दंडारोपण की जांच हेतु मानक प्रपत्र–5 का प्रयोग किया जाएगा।
प्रमुख आरोप पत्र में सम्मिलित किए जाने वाले बिंदु
i. आरोपित कर्मचारी का पूरा विवरण
ii. जांच कराए जाने का निर्णय
iii. दस्तावेजों के निरीक्षण की सुविधा
iv. बचाव सहायक (Defence Helper) नामित करने की सुविधा
v. लिखित बचाव प्रस्तुत करने की सुविधा
vi. अनुपस्थित रहने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही की चेतावनी
vii. राजनीतिक या बाहरी दबाव एवं हस्तक्षेप के विरुद्ध चेतावनी
आरोप पत्र के साथ अनिवार्य संलग्नक
i. आरोपों के अनुच्छेद – अनुलग्नक–I
ii. आरोपों का विस्तृत विवरण – अनुलग्नक–II
iii. दस्तावेजों एवं अभिलेखों की सूची – अनुलग्नक–III
iv. सरकारी पक्ष के गवाहों की सूची – अनुलग्नक–IV
उपरोक्त सभी अनुलग्नकों पर अनुशासनिक प्राधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, अन्यथा आरोप पत्र तकनीकी आधार पर त्रुटिपूर्ण एवं निरस्त योग्य माना जाएगा।
जांच के दौरान अधिकार एवं प्रक्रिया
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आरोप पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों की प्रतियां आरोपित कर्मचारी को पहले से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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कर्मचारी को अतिरिक्त दस्तावेजों के निरीक्षण एवं नोट्स बनाने की सुविधा दी जाएगी।
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लिखित स्पष्टीकरण देने हेतु पर्याप्त समय दिया जाएगा।
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स्पष्टीकरण संतोषजनक होने पर आरोप समाप्त किए जा सकते हैं या लघु दंड देकर जांच समाप्त की जा सकती है।
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आवश्यक होने पर अनुशासनिक प्राधिकारी स्वयं जांच कर सकता है या जांच अधिकारी नियुक्त कर सकता है।
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सामान्यतः वही व्यक्ति जांच अधिकारी नहीं बनाया जाना चाहिए जिसने तथ्य खोज जांच (Fact Finding Inquiry) की हो।
बचाव सहायक (Defence Helper)
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रेलवे सेवक अपना पक्ष किसी अन्य रेलवे कर्मचारी (सेवानिवृत्त कर्मचारी सहित) की सहायता से प्रस्तुत कर सकता है।
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मान्यता प्राप्त संघ के पदाधिकारी, जिसने कम से कम एक वर्ष तक पद धारण किया हो, बचाव सहायक बन सकता है।
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एक सेवानिवृत्त कर्मचारी एक समय में 7 से अधिक मामलों में बचाव सहायक नहीं बन सकता। (RBE 83/03)
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बचाव सहायक को विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जा सकता है, परंतु यात्रा भत्ता या महंगाई भत्ता देय नहीं होगा।
जांच रिपोर्ट
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जांच अधिकारी को साक्ष्यों का न्यायसंगत मूल्यांकन कर निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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रिपोर्ट की प्रति अनुशासनिक प्राधिकारी के निर्णय से पूर्व आरोपित कर्मचारी को दी जाएगी।
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रिपोर्ट में निम्नलिखित स्पष्ट होंगे–
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आरोपों का विवरण
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रेलवे सेवक का प्रतिवेदन
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प्रत्येक आरोप पर साक्ष्य का मूल्यांकन
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प्रत्येक आरोप पर निष्कर्ष एवं कारण
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महत्वपूर्ण निर्देश
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अनुशासनिक प्राधिकारी को जांच रिपोर्ट पर निष्पक्ष रूप से विचार करना होगा।
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यदि जांच अधिकारी के निष्कर्षों से असहमति हो, तो कर्मचारी को कारण बताकर स्पष्टीकरण का अवसर देना होगा।
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जांच रिपोर्ट में “आरोप पूर्णतः सिद्ध है” जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, जिससे पूर्वाग्रह न झलके।
