06.रेल अधिनियम 1989 की मुख्य धाराएँ 01.07.1990 से लागू

धारा 49 : स्टेशनों पर गाडियों की समय सारणी एवं किराया सूची प्रदर्शित करना।

धारा 50: किराये के भुगतान पर टिकट जारी किया जायेगा।

धारा 51 : गाडी में / श्रेणी में स्थान उपलब्ध होने की शर्त पर टिकट जारी किया जायेगा। यदि यात्रियों को जगह उपलब्ध न होने के कारण निम्न श्रेणी में यात्रा करनी पडती है, तो दोनो श्रेणियों के किराये के अंतर की वापसी की जायेगी।

धारा 52 : यदि टिकट रद्दीकरण हेतु प्रस्तुत किया जाता है, तो रेल प्रशासन व्दारा टिकट रद्द किया जायेगा तथा नियमानुसार धनवापसी दी जायेगी।

धारा 53 : टिकट का हस्तांतरण करने की अनुमति नहीं है, परंतु आरक्षित टिकटों पर नाम में परिवर्तनअधिकृत रेल कर्मचारी व्दारा नियमानुसार किया जा सकता है।

धारा 54 : यात्रा के दौरान या यात्रा समाप्ति पर अधिकृत रेल कर्मचारी व्दारा माँग की जाने पर टिकट या पासजाँच के लिए प्रस्तुत / जमा करना चाहिए।

धारा 55 / 1 : कोई भी व्यक्ति रेल के सवारी डिब्बे में उचित पास या टिकट के या किसी अधिकृत रेल कर्मचारी की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं करेगा।

धारा 55 / 2 : यदि टिकट प्राप्त करने में असमर्थ है तो बिना टिकट यात्रा आरंभ करने हेतु अधिकृत रेल कर्मचारी व्दारा प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है, जिसे गार्ड प्रमाण पत्र कहते है, इस शर्त पर कि माँग किये जाने पर किराये का भुगतान करेगा।

धारा 56 : संक्रामक रोग से पीडित व्यक्ति अधिकृत रेल कर्मचारी की अनुमति के बिना रेल सीमा में प्रवेश या रेल से यात्रा नहीं कर सकता है।

धारा 57 : रेल प्रशासन प्रत्येक डिब्बे में वहन की जाने वाली अधिकतम यात्रियों की संख्या निर्धारित करेगा तथा डिब्बे के बाहर या अंदर हिंदी, अंग्रेजी तथा प्रादेशिक भाषा में अंकित करेगा।

धारा 58 रेल प्रशासन व्दारा प्रत्येक यात्री गाडी में केवल महिलाओ के उपयोग हेतु एक कक्ष या उचित संख्या में बर्थ उपल्ब्ध कराए जायेंगे। इसके अलावा यात्री गाडियों में महिलाओं के लिए व्दितीय श्रेणी का एक अनारक्षित यान भी आरक्षित रखा जाता है, जिसमें केवल महिला यात्री और उनके साथ 12 वर्ष से कम आयु के बालक यात्री यात्रा कर सकते हैं।

धारा 59 : रेल प्रशासन व्दारा यात्री गाडी में रेल कर्मचारियों तथा यात्रियों के बीच संचार साधन उपलब्ध कराए जायेंगे, जैसे खतरे की जंजीर। यदि इन साधनों का दुरूपयोग होता है तो रेल प्रशासन व्दारा इस सुविधा को समाप्त किया जा सकता है।

धारा 60: केंद्र सरकार व्दारा रेल प्रशासन को विभिन्न विषयों में नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। जैसे टिकट रद्द करने पर धनवापसी के नियम।

धारा 67 : इस धारा के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के रेल सीमा में खतरनाक और बदबूदार माल नहीं ला सकता है। खतरनाक या बदबूदार माल बुक करते समय स्टेशन मास्टर को अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए।

धारा 137 रेल प्रशासन को धोखा देने के इरादे से उचित टिकट या पास के बिना यात्रा करना रु 1,000 /- तक जुर्माना या 6 माह तक की कैद या दोनो, न्यूनतम जुर्माना रु 500/- होगा।

धारा 138: बिना टिकट यात्रा करते पाये जाने पर पाये जाने के स्थान तक अतिरिक्त किराया अतिरिक्त प्रभार के साथ लिया जायेगा। निम्न्न श्रेणी के टिकट पर उच्च श्रेणी में या अधिकृत दूरी से आगे यात्रा करते पाये जाने पर, पाये जाने के स्थान तक देय तथा दत्त किराये का अंतर अतिरिक्त प्रभार के साथ लिया जायेगा। जुर्माना नहीं भरने पर एक माह की कैद (कम से कम 10 दिन)।

धारा 139 : धारा 138 में बताये गये अतिरिक्त किराया तथा अतिरिक्त प्रभार का भुगतान नहीं करने पर या असमर्थ होने पर, अधिकृत रेल कर्मचारी व्दारा किसी भी स्टेशन पर उतारा जा सकता है। परंतु महिला या बालक को, यदि उनके साथ कोई पुरुष यात्री नहीं हो तो केवल दिन के समय में प्रस्थान स्टेशन, जंक्शन या टर्मिनल स्टेशन या जिला मुख्यालय पर ही उतारा जायेगा।

धारा 141 : खतरे की जंजीर का दुरुपयोग करने पर रु 1,000/- तक जुर्माना या एक वर्ष तक की कैद या दोनों। पहले अपराध के लिए दोषसिद्धि की दशा मे रु 500/- के जुर्माने तथा व्दितीय या पश्चातवर्ती अपराध के लिए तीन माह की कैद से कम नही होगा ।

धारा 142 (1): यदि कोई व्यक्ति अपना आरक्षित टिकट या सीजन टिकट किसी अन्य यात्री को बेचता है, या ऐसा प्रयत्न करता है, तो रु 500/- तक जुर्माना या तीन माह तक की कैद या दोनों सजाएँ दी जा सकती है तथा वह टिकट जब्त किया जायेगा।

धारा 142 (2): यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त तरीके से कोई टिकट खरीदता हुआ पाया जाता है, तो रु 500/- तक जुर्माना या तीन माह तक की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है। इसके अलावा टिकट जब्त किया जायेगा और बिना टिकट यात्री माना जायेगा।

धारा 143 : यदि कोई व्यक्ति अवैध रुप से टिकटों को बेचने का व्यवसाय करता है, तो उसे रु 10,000 /- जुर्माना या तीन वर्ष की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है, तथा टिकट जब्त किए जायेंगे।

धारा 144 : रेल सीमा में अनाधिकृत रुप से माल बेचते या भीख माँगते हुए पाए जाने पर रु 2,000/- तक जुर्माना या एक वर्ष की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 145 : यदि कोई व्यक्ति रेल सीमा में नशे की हालत में प्रवेश करता है, या अशिष्ट कार्य करता है, या अश्लील भाषा का प्रयोग करता है, या रेल्वे व्दारा उपलब्ध कराई गई किसी सुविधा में बाधा डालता है, तो रु 500 /- तक जुर्माना या 06 माह तक की कैद या दोनों सजायें दी जा सकती है। धारा 145 (बी) रेल परिसर में बुकना एवं गंदगी फैलाने पर 500/- रुपये तक जुर्माना।

धारा 146 : यदि कार्यरत रेल कर्मचारी के कार्य में किसी व्यक्ति व्दारा बाधा उत्पन्न की जाती है, तो रु 1000 /- तक जुर्माना या 06 माह तक की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 147 : यदि कोई व्यक्ति गैर कानूनी रुप से रेल सीमा में प्रवेश करता है, तो रु 1000/- तक जुर्माना या 06 माह तक की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 155 (1): आरक्षित यान में अनारक्षितटिकट धारक यात्री व्दारा प्रवेश करने पर तथा अन्य यात्री की आरक्षित शायिका जबरदस्ती ग्रहण करने पर रु 500 तक जुर्माना किया जायेगा तथा वहाँ से हटाया जायेगा।

धारा 155 (2): यदि कोई यात्री अनारक्षित यान में अन्य यात्रिओं के विधिवत प्रवेश को रोकता है, तो 200 रुपये तक जुर्माना किया जायेगा।

धारा 156: यदि कोई यात्री / व्यक्ति किसी रेल सेवक की चेतावनी देने के पश्चात भी गाडी की छत पर, पायदान पर या इंजन पर यात्रा करते हुए पाये जाता है, तो रु 500/- तक जुर्माना या 03 माह तक की कैद या दोनों सजाएँ दी जा सकती हैं।

धारा 157 : यदि कोई यात्री अपने पास या टिकट मे जानबूझकर फेरबदल करता है या विरूपित करता है, तो रु 500 /- तक जुर्माना या 3 महीने तक की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 162 : यदि कोई पुरुष यात्री महिलाओं के लिए आरक्षित यान में यात्रा करते पाया जाता है, तो रु 500/- तक जुर्माना तथा वहाँ से हटाया जायेगा और टिकट जब्त किया जायेगा।

धारा 164 : यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के खतरनाक या विस्फोटक माल रेल सीमा में लाता है या वहन करता है, तो रु 1000/- तक जुर्माना या 3 वर्ष तक की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 166 : स्टेशन / चल स्टॉक पर लगे हुए बोर्ड, पोस्टर या दस्तावेज बिगाडने पर या फाडने पर या उन पर लिखे कोई अंक या अक्षर मिटाने पर रु 500/- तक जुर्माना या 01 माह की कैद या दोनो सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 167 रेल सीमा / रेल डिब्बों में धुम्रपान करना वर्जित है, ऐसा करते पाया जाने पर रु200/- तक जुर्माना से दण्डनीय होगा।

धारा 172 : यदि कोई रेल कर्मचारी नशे की हालत में ड्यूटी पर पाया जाता है, तो रु 500/- तक जुर्माना किया जायेगा, यदि कर्मचारी के नशे की हालत के कारण यात्रियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, तो 01 वर्ष तक की कैद या जुर्माना या दोनो सजाएँ दी जा सकती है। 

धारा 175 : यदि कोई ड्यूटी पर कार्यरत रेल कर्मचारी किसी यात्री की सुरक्षा को खतरा पहुँचाता है, तो रु 1000/- रुपये तक जुर्माना या दो वर्ष तक की कैद या दोनों सजाएँ दी जा सकती है।

धारा 179 : धारा 137 से 139, 141 से 147, 155 से 157, 162, 164, 166, 167, 172 तथा 175 के अंतर्गत अर्थात यदि कोई व्यक्ति असंज्ञेय अपराध करता है तो बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है, परंतु 24 घंटे के अंदर मॅजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

धारा 180 : धारा 179 में बतायी गई धाराओं को छोडकर अन्य धाराओं के अंतर्गत अर्थात यदि कोई व्यक्ति संज्ञेय अपराध करता है या धारा 138 के अधीन मांगे गए अधिक प्रभार या अन्य राशी देने उत्तरदायी है, अपना नाम तथा पता गलत बताता है, या फरार होने की संभावना है तो बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है, परंतु 24 घंटे के अंदर मॅजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

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