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Rajbhasha(राजभाषा)

15. हिंदी में कार्य-साधक ज्ञान और हिंदी में प्रवीणता में अंतर

(क) हिंदी में कार्य-साधक ज्ञान

हिंदी में कार्य-साधक ज्ञान का अभिप्राय ऐसे ज्ञान से है, जिसमें कर्मचारी हिंदी विषय के साथ मैट्रिक या उसके समकक्ष अथवा उससे उच्चतर परीक्षा उत्तीर्ण हो,
अथवा
हिंदी में प्रवीणता का अभिप्राय ऐसे ज्ञान से है, जिसमें कर्मचारी ने हिंदी माध्यम से मैट्रिक या उसके समकक्ष अथवा उससे उच्चतर परीक्षा उत्तीर्ण की हो।


(ख) निम्नलिखित परीक्षाओं के माध्यम से हिंदी ज्ञान
  1. हिंदी शिक्षण योजना की प्रारंभिक परीक्षा या उससे कम स्तर की कोई परीक्षा,
    अथवा
    उसके समकक्ष किसी निर्धारित परीक्षा में सफलता प्राप्त की हो, जो किसी कोटि के लिए निर्धारित की गई हो।

  2. सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य परीक्षा में सफलता प्राप्त की हो, जैसे –

    • हिंदी प्रचार सभा

    • स्नातक या उसके समकक्ष

    • अथवा उससे किसी उच्च स्तर की परीक्षा में ऐच्छिक विषय के रूप में हिंदी विषय लिया हो।


(ग) घोषणा के आधार पर छूट

यदि किसी कर्मचारी ने निर्धारित प्रपत्र में यह घोषणा की हो कि उसे हिंदी में कार्य-साधक ज्ञान प्राप्त है, तो ऐसे कर्मचारी को अनिवार्य हिंदी प्रशिक्षण से छूट दी जाएगी।

इसी प्रकार, यदि किसी कर्मचारी ने यह घोषणा की हो कि उसे हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है, तो उसे भी अनिवार्य हिंदी प्रशिक्षण से छूट दी जाएगी।


(घ) कार्य-साधक ज्ञान और प्रवीणता का व्यावहारिक अंतर
  • हिंदी में कार्य-साधक ज्ञान का अर्थ है —
    केवल इतना ज्ञान कि कर्मचारी हिंदी में काम चला सके, अर्थात वह हिंदी में कार्य करने में पूर्णतः दक्ष नहीं होता।

  • हिंदी में प्रवीणता का अर्थ है —
    हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति, जो हिंदी में कार्य करने में पूर्ण रूप से सक्षम एवं दक्ष हो।

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