Coaching General
14.Fire Fighting (अग्निशमन व्यवस्था) and First Aid (प्रथमोपचार)
प्रथमोपचार:-
सामान्यतयः आगजनी या आग लगने की घटना से गंभीर नुकसान होता है, जो कि मानव मृत्यू एवम जानमाल की हानि / क्षति के रूप में सामने आता है। गाडी में या स्टेशन पर आग लगने की घटना को टालने के विषय को गंभीरता से लिया जाता है। समय समय पर इस विषय के बारे में जगरूकता शिबिर आयोजित किये जाते है। प्रशिक्षण संस्थानों में इस विषय का प्रशिक्षण संबंधित रेल कर्मचारियों को दिया जाता है। रेल्वे स्टेशनों के विभिन्न कार्यालयों तथा नियोजित स्थानों पर तथा गाडियों के वातानूकूल यानों में, पॅन्ट्रीकार में, गार्ड कॅबिन में तथा इंजिन में अग्निशमन यंत्रों को रखा जाता है। इसी प्रकार रेल परिसर में विभिन्न कार्यालयों मेंअग्निशमन यंत्रों को रखा जाता है। अलग अलग प्रकृति की आग बुझाने के लिये अलग अलग अग्निशमन यंत्रों को उपयोग में लाया जाता है।
यह 3 प्रकार के होते है।
(1) पानी (APW)
(2) कॉर्बनडाय ऑक्साइड (CO2)
(3) ड्राय कैमिकल (ABC, BC, DC) ध्यान देने योग्य बातें
1. सभी अग्नीशामक यंत्रों की वैधता एक निश्चित अवधि की होती है, जो प्रत्येक अग्रीशामक यंत्र पर लिखी होना आवश्यक है। तिथि समाप्ती के बाद अग्ग्रीशामक यंत्रों को री-फिल किया जाता है, इन को ध्यान में रखकर समय से पूर्व अग्नीशामक यंत्रों को री-फिल करवाना चाहिये।
2. समय समय पर रेलकर्मचारियों को आग से बचाव के लिये अग्नीशामक यंत्रों के उपयोग करने की पध्दति समझाया जाना चाहिये।
3. आग लगने के अलग अलग कारण हो सकते है, इन कारणों के अनुसार जानकारी दी जानी चाहिये।
4. गाडी में, स्टेशन पर तथा रेल परिसर में अग्नीशामक यंत्रों के उपलब्धता के स्थानों के बारे में सूचना जगह जगह पर लिखी होना चाहिये।
5. भारतीय रेल के सभी प्रशिक्षण संस्थानों में इस विषय की जानकारी दी जानी चाहिये।
